पूर्णिया जिले के स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को लाइन बाजार क्षेत्र में एक बड़ी औचक छापेमारी अभियान चलाया, जिसमें कई निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण किया गया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी और सिविल सर्जन के निर्देश पर की गई, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। टीम ने मौके पर ही कई प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों की जांच की और बिना वैध लाइसेंस, अपंजीकृत और मानकों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
स्वास्थ्य विभाग की टीम में जिला स्वास्थ्य समिति के अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, और चिकित्सा प्रभारी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई नर्सिंग होम में बिस्तरों की संख्या निर्धारित मानक से कम थी, आपातकालीन सुविधाएं अपर्याप्त थीं, और क्वालिफाइड डॉक्टरों तथा नर्सों की उपस्थिति का रिकॉर्ड अधूरा था। कुछ पैथोलॉजी सेंटरों में बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के नियमों का पालन नहीं हो रहा था, जबकि अल्ट्रासाउंड सेंटरों में रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति और मशीनों के कैलिब्रेशन प्रमाणपत्र नहीं मिले। टीम ने इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।
छापेमारी के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के संचालक मौके से भागने का प्रयास करते दिखे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें रोककर पूछताछ की। स्वास्थ्य विभाग ने तीन नर्सिंग होम और दो पैथोलॉजी सेंटरों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है, जबकि चार अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जिन प्रतिष्ठानों के दस्तावेज अधूरे पाए गए, उन्हें 15 दिनों के भीतर सभी मानकों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। लाइन बाजार के एक निवासी ने बताया कि लंबे समय से इन क्लीनिकों में मरीजों से मनमानी फीस वसूली जा रही थी और गुणवत्ताहीन सेवाएं दी जा रही थीं। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जिले के सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित जांच की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अवैध स्वास्थ्य सेवा की जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस छापेमारी से स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता स्पष्ट होती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी पर्याप्त नहीं है। नियमित निगरानी और सख्त लाइसेंसिंग प्रक्रिया से ही अवैध संचालन पर अंकुश लगाया जा सकता है। पूर्णिया में निजी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को निरंतर कदम उठाने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग ने भविष्य में ऐसे अभियानों को और तेज करने की बात कही है।